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अनुभव · 1d ago

पूर्णिया में शहनाई

‘शहनाई’ से अपनापा है। इसकी धुन से मन के तार जुड़े हैं। ढेर सारी यादें हैं। बचपन की स्मृति में शहनाई है। जैसे जैसे बड़ा हुआ मन के भीतर उस्ताद  बिस्मिल्ला खां आ बसे। शहनाई मतलब उस्ताद। फिर एक ...
अनुभव · 1W ago

गाम-घर

अजीब इत्तेफाक है, सड़क, अंचल और यादों को बेवजह कुरेदते हुए अचानक एक ख्याल आता है और आपका कथावाचक निकल पकड़ता है, वहीं जहां बस जाने की उसकी न जाने कब से इच्छा है। शहर की रातों को एक किनारे रख...
अनुभव · 2W ago

छठ से अनुराग- 2017

छठ उत्सव से अनुराग बढ़ता ही जा रहा है। यह उत्सव मुझे खेत-खलिहान और नदी से इश्क करना सीखाता है। आज से पांच वर्ष पहले तक छठ को लेकर इतना अनुराग नहीं था लेकिन अपने गाम-घर लौटने के बाद इस उत्सव ...
अनुभव · 1M ago

यही है अपनी दीपावली, यही है अपना धनतेरस !

चनका में कल सुबह से लेकर रात तक बस सोलर लालटेन की बात होती रही। दीपावली में फूँकने की आदत के बीच हम उन बच्चों के बारे में सोच रहे थे जो शाम ढलते ही रोशनी के अभाव में पढ़ाई नहीं कर पाते।सोशल ...
अनुभव · 1M ago

इस दीपावली सोलर लालटेन !

इस बार दीपावली में हम अपने गाँव के कुछ बच्चों को सोलर लालटेन देने जा रहे हैं, शाम में पढ़ाई करने के लिए। दोस्तों के सहयोग से ‘चनका रेसीडेंसी’ यह कदम उठा रही है।दीप, मोमबत्ती और पटाखों से अलग...
अनुभव · 1M ago

धान की खेती और एक बीघा जमीन !

खेत की जुताई में ख़र्च-  ₹ 1500 खाद  - ₹3400बीज -  ₹2000 (8 KG)रोपाई - ₹1000 ( दस मजदूर)सिंचाई-  ₹2400(चार पटवन. पहली बार छह घंटा, दूसरी बार पाँच और तीसरी दफे भी पाँच घंटा। पटवन का ख़र्च १५०...
अनुभव · 1M ago

न्यूज चैनल के दर्शकों की बात !

पूर्णिया और इसके आसपास  के इलाक़ों में पिछले पाँच साल से लगातार रहते हुए एक से बढ़कर एक स्थानीय लोगों से
अनुभव · 1M ago

धान में बाली आई है !

किसानी करते हुए हम साल में तीन फ़सल को बनते -बिगड़ते देखते हैं। कभी तेज़ बारिश तो कभी आँधी
अनुभव · 2M ago

बाढ़ से बचाव के लिए नदी से मिलना होगा- 3

हर साल सीमांचल के कुछ इलाके बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित होते हैं। मसलन पूर्णिया का अमौर और बायसी से जुड़ा इलाका। हर साल यहां बाढ़ आती है, राहत शिविर में लोगों को जाना पड़ता है। इस इलाके में बा...
अनुभव · 2M ago

बाढ़ से बचाव के लिए नदी से मिलना होगा- 2

अररिया -फ़ारबिसगंज-पूर्णिया-कटिहार, इन सभी इलाक़ों में इस बार बाढ़ ने तबाही मचाई है। लेकिन जब भी हम बाढ़ की बात करते हैं तो बस कोसी-महानंदा-गंगा में सिमट जाते हैं, जबकि हम इन नदियों की सहायक...