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अनुभव · 4W ago

पूर्णिया के कथावाचक थे डॉ. रामेश्वर प्रसाद

वे मुझे पूर्णिया की कथा सुनाते थे, जिसे भी पूर्णिया की कहानियों से रुचि होती, वह ज़रूर एक दफे उनके घर जाता था। पूर्णिया से उन्हें ख़ास लगाव था। वे ऑक्सफोर्ड में पढ़ा चुके थे। वे हमारे इतिहास...
अनुभव · 1M ago

आगरा मतलब ‘आगरा घराना’ भी होता है !

एक गर्म दोपहर दिल्ली में अपने कमरे में बैठा था। अपना दोस्त ‘ दादा’ आता है और कहता है आगरा चलोगे ?
अनुभव · 2M ago

नीतीश-धान-जापान

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जापान यात्रा से मन में ख़्याल आया कि सीएम की जब जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे से मुलाक़ात हुई होगी तब क्या धान पर बातचीत हुई होगी ?खेती-बाड़ी से जुड़े सूबे के मु...
अनुभव · 2M ago

पूरैनिया से पूर्णिया

बिहार का पूर्णिया जिला आज अपना 248वां स्थापना दिवस मना रहा है। जिला स्तर पर ढेर सारे कार्यक्रम होते हैं। मीडिया में जिला के बारे में ढेर सारी रोचक कहानियाँ छपती है। हर बार पूर्णिया के पहले क...
अनुभव · 2M ago

आँखों में पिता

मेरे पास बाबूजी की तस्वीरें बहुत कम है, गिनती के तीनजबकि मेरे पास है उनकी ढेर सारी बातें ।
अनुभव · 2M ago

चनका के लिए ख़ुशखबरी #ChankaResidency

चनका को लेकर लगातार कुछ न कुछ करते रहने की ज़िद को आज एक मुक़ाम हासिल हुआ है। केंद्र की ‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन
अनुभव · 3M ago

मेला में ‘किताबगंज’

जब दिल्ली में था तो गाम के मेले को याद करता था। मेले की पुरानी कहानी बांचता था, और अब जब दिल्ली से दूर अपने गाम-घर में हूं तो 'किताब मेला' और ‘किताबगंज’ की याद आ रही है।कॉलेज के दिनों में और...
अनुभव · 3M ago

राजशेखर का गाम-घर

समय का फेर परेशान कर रहा है। लाठी लिए कबीर मिलते हैं और कहते हैं , “यह वक़्त भी गुज़र जाएगा..”। इस उतार-चढ़ाव
अनुभव · 4M ago

अनुपम आदमी ‘अनुपम मिश्र’

अनुपम मिश्र कब ज़िंदगी में आए, यह बता नहीं सकता। अपनी किताब ‘ आज भी खरे हैं तालाब’ की तरह वह
अनुभव · 5M ago

पूर्णिया में शहनाई

‘शहनाई’ से अपनापा है। इसकी धुन से मन के तार जुड़े हैं। ढेर सारी यादें हैं। बचपन की स्मृति में शहनाई है। जैसे जैसे बड़ा हुआ मन के भीतर उस्ताद  बिस्मिल्ला खां आ बसे। शहनाई मतलब उस्ताद। फिर एक ...