| Blog Name: |
अभिव्यक्ति |
| Url: |
http://www.feelings44ever.blogspot.com/ |
| Language: |
Hindi |
| Topics: |
poem, gazal, kavita |
| Description: |
जीवन्त सदा के लिये ....सिर्फ अभिव्यक्ति ही हमारे जीवन को अर्थ प्रदान करती है। यदि मानव के पास कोई धन है... तो वो है उसके अन्तर्मन में हर पाल पालन वाले विचार और उनकी अभिव्यक्ति... और इस चिट्ठे की सहायता से में अपने मन के विचारो और भावो को शब्द देने का प्रयतन कर रही हूँ.... |
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ये प्यास पीते,और भूख खाते है
यू ही नहीं किसान पूजे जाते है ये प्यास पीते,और भूख खाते है बेबसी के आसू मे आँचल भीगाउसे हमदर्दी की धूप मे सुखाते है जिस्म का बोझ नहीं उठता हमसे और ये खेतो मे गठ्ठर उठाते है करते है शाद्ध बड़ी श्रद्धा के साथ मरने के बाद भी रिश्ता निभाते है
ये पत्थर की दुनिया है .....!!
ये पत्थर की दुनिया है । खव्बो को संभाले रखना ।। ले रक्खा है हाथो में नामक । अपने घवो को बचाकर रखना।। ठोकर पर सहारा भी तुम को न मिलेगा । अगर गिरो तो उठने का होसला रखना ।। रूठ जायगी खुशी एक दिन । इस लिये गम को अपना यार बना कर रखना ।। सलामत रहे हर रिश्ता
ये पत्थर की दुनिया है .....!!
ये पत्थर की दुनिया है । खव्बो को संभाले रखना ।। ले रक्खा है हाथो में नामक । अपने घवो को बचाकर रखना।। ठोकर पर सहारा भी तुम को न मिलेगा । अगर गिरो तो उठने का होसला रखना ।। रूठ जायगी खुशी एक दिन । इस लिये गम को अपना यार बना कर रखना ।। सलामत रहे हर रिश्त
मन चंचल गगन पखेरू है,
मन चंचल गगन पखेरू है,मैं किससे बाँधता किसको.मैं क्यों इतना अधूरा हूँ,की किससे चाह है मुझको.वो बस हालात ऐसे थे, कि बुरा मैं बन नहीं पाया.मैं फ़रिश्ता हूँ नहीं पगली,कोई समझाए तो इसको.ज़माने की हवा है ये, ये रूहानी नहीं साया.मगर ताबीज़ ला दो तुम,तसल्ली गर
हैं लुटे घरौंदे रोज वहीँ पर जहाँ पुलिस
जो छूट गई है दुनिया में,, मेरी ही कुछ हस्ती थीसाहिल छोर के दरिया डूबी , मजबूत बड़ी वो कश्ती थीउनका घर तो रौशन था पर डर था सबके चेहरे परएक उनके घर में रौनक थी और जलती सारी बस्ती थीकुछ जिन्दा और मुर्दा लड़ते अल्लाह ईश के नाम पर खामोशी मजबूरी थी कुछ जान य
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