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आरंभ · 2W ago

गूगल बाबा आज दोपहर 12.30 बजे रहेंगे लाईव : एड सेंस प्रयोक्‍ताओं के लिए

गूगल आपके ब्‍लॉग एवं साईटों को ऐडसेंस के अनुरूप बनाने एवं एडसेंस से संबंधित आपके सवालों का...
आरंभ · 2W ago

साहब जी ! क्या हम बस्तर का दर्द नहीं लिख सकते?

बस्तर आदिम युग से वर्तमान दौर तक हमेशा मनमोहक, आकर्षक, सुंदर और रमणीय रहा है। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बस्तर देश-दुनिया की जरूरतों की पूर्ति का केन्द्र रहा है। साथ ही केन्द्र रहा है बस्तर...
आरंभ · 1M ago

पीडीएफ या वर्ड फाईल को अपने ब्‍लॉग में पब्लिश करना

भाई देव लहरी अपने ब्‍लॉग में पीडीएफ या वर्ड फाईल को पब्लिश करना चाहते हैं। इसे कैसे पब्लिश...
आरंभ · 1M ago

कोदूराम दलित की साहित्य साधना : अम्‍बेडकर जयंती पर विशेष

मनुष्य भगवान की अद्भुत रचना है, जो कर्म की तलवार और कोशिश की ढाल से, असंभव को संभव कर सकता है । मन और मति के साथ जब उद्यम जुड जाता है तब बडे - बडे तानाशाह को झुका देता है और लंगोटी वाले बापू...
आरंभ · 2M ago

'पहुना संवाद' महानदी और बम्‍हपुत्र का मिलन

असम के छत्‍तीसगढ़ वंशियों नें आज 'पहुना संवाद' के दूसरे दिन सभा में अपना संस्‍मरण सुनाया औ...
आरंभ · 2M ago

बदलते हुए गॉंव की महागाथा : बिपत

वर्तमान छत्तीसगढ़ के गाँवों में कारपोरेट की धमक और तद्जन्य शोषण और संघर्ष की महागाथा है कामेश्वर का उपन्यास ‘बिपत‘। इसमें गावों में चिरकाल से व्याप्त समस्याओं, वहाँ के रहवासियों की परेशानियों एवं गाँवों से प्रतिवर्ष हो रहे पलायन की पीड़ा का जीवन्त चित्...
आरंभ · 2M ago

आकाशवाणी रायपुर से चंदैनी गोंदा के छत्तीसगढ़ी गीतों का पहला प्रसारण

जैसा की आप सब जानते ही हैं कि चंदैनी गोंदा के गीत छत्तीसगढ़ में बहुत लोकप्रिय हो गए थे और पूरे छत्तीसगढ़ में इसे अपने-अपने ढंग से गाया-गुनगुनाया जाने लगा था। उस समय दाऊ रामचंद्र देशमुख चंदैन...
आरंभ · 2M ago

छत्तीसगढ़ की संस्कृति के दो महत्वपूर्ण स्तम्भ : खुमान लाल साव और डॉ. पीसीलाल यादव

डॉ.पीसी लाल यादव छत्तीसगढ़ में साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में चित-परिचित नाम हैं। इन्...
आरंभ · 2M ago

भाषा का प्रचार : प्रचार की भाषा

इसाई समुदाय सदियों से से क्षेत्रीय भाषाओं में अपने ईश्वर का संदेश प्रसारित प्रचारित करते रहा है। इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ी के दस्तावेजीकरण के लिए आरंभिक रूप स...
आरंभ · 3M ago

आधुनिकता बोध या पतनशील लोक

एक जमाना था जब मोटियारी टूरी-टूरा मिथलेश साहू और ममता चंद्राकर के गाये ' मोर चढ़ती जवानी के...