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एक: · 1Y ago

इसका नाम प्रेम है

" यह विचित्र है इसका नाम प्रेम हैयह सहसा ही उपज जाता है प्रयासहीनकोई नहीं जानता हो जाएकब कहाँ क्यों कैसे किस सेयह विचित्र है इसका नाम प्रेम हैयह चमत्कारी बड़ा चतुर सुजान हैएक मुस्कान के बदले ...
एक: · 1Y ago

बरेजों की भाजी

भारतीय संस्कृति में 'पान' के महत्व से हम सभी परिचित हैं। मुखवास के रूप में ही नहीं बल्कि इसका महत्व धार्मिक, प्रेम व सम्मान के तौर पर भी है। हमारे बुंदेलखंड में भी देशी पान की एक किस्म जिसे ...
एक: · 1Y ago

सबसे बड़ी सौगात है जीवन

परसों म.प्र.मा.शि.मंडल ने कक्षा 10वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया था। आज जैसे ही अखबार की सबसे पहली खबर पर नजर गई तो मन दुःख, क्षोभ और वितृष्णा से भर उठा। यह खबर थी असफल आठ बच्चों ने आत्महत...
एक: · 1Y ago

प्रेम

" प्रेम प्रेम और प्रेम इस परिभाषा के इर्दगिर्दकितनी बातें कहीं गईंना जाने कितनी सुनी गईंविच्छेदन जाने हुए कितनेऔर इस एक प्रेम में रक्त अस्थि मज्जा स्नायु नाड़ी तंत्र पाये कितने
एक: · 1Y ago

// वर्णान्धता ( Colour blindness ) //

मोटे तौर पर 'वर्णान्धता' से आशय एक ऐसी अक्षमता से है जब व्यक्ति रंगों को देख नहीं पाता या रंगों के बीच अंतर नहीं कर पाता है। इसके बहुत से कारण हैं और यह कई प्रकार की होती है।साथ में दिए गये ...
एक: · 1Y ago

कविता का जन्म

कविता का जन्म निश्चय ही करुणा से हुआ है | किसी घटना से जब मानव मन के अंतरतम स्तर पर स्पर्श होता है तो काव्य प्रकट हो जाता है | इस विश्व का प्रथम पौरुषेय काव्य ग्रन्थ महर्षि वाल्मीकि की रामाय...
एक: · 1Y ago

जाल

क्या कभी फँसते देखा है मकड़ी को अपने ही जाल में उसने खुद बुना है इसे फँसने का डर नहीं उसेउसे पता है कहाँ से निकलना है किधर पहुँचना है किसे कब कैसे फँसाना हैऔर जकड़ के 
एक: · 1Y ago

जीवन परीक्षा

यह बात लगभग 6-7 वर्ष पूर्व की है. हमारा स्वैच्छिक संगठन मध्यप्रदेश शासन द्वारा ऑनलाइन प्रदत्त की जाने वाली सेवाओं को जनता तक पहुँचाने का सुविधा केंद्र चलाता है. ऐसे में एक ग्रामीण आदिवासी छा...
एक: · 1Y ago

नशे में कौन नहीं है मुझे बताओ जरा

आखिर नशे का इतना आकर्षण क्यों है? हर सरकार लगातार नशीले और मादक पदार्थ महँगे कर देती है; बावजूद इसके इनकी बिक्री में कोई कमी नहीं आती, बल्कि बढ़त ही होती है,जबकि नशा एक सामाजिक बुराई है।नशे क...
एक: · 1Y ago

समय तुम

" कभी टिक-टिक करती सुई सुन के भी अनसुनी कर दी कभी घड़ी पर हाथ रख दिया तो कभी काँटा ही थाम लियासमय तुम मेरे वश में नहीं तुम्हें रोकने का पर हर जतन कर लिया कहीं तो ठहर जाओ कि अपना रूखा-सूखा सब ...