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खामोशियाँ...!!! गम के तले अश्को की...!!!

Hindi
http://khamosiyan.blogspot.in/
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

लप्रेक १३

जानती हो श्रेया हेडफोन का बायाँ शिरा तुम्हारी कानों में क्यों लगाता ? गानों की इमोशनल बातें बाए कानो तक जल्दी पहुँचती। "अच्छा जनाब, फिर दाहिने कानो का कॉन्सेप्ट समझाइये" श्रेया नें पूछा मे...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

लप्रेक १२

एनफील्ड की पिछली सीट पर बैठी दिव्या पिछले दस मिनट से बोले जा रही थी। कुछ रेस्पॉन्स ना आता देख उसनें खीजते हुए कहा, "या तो अपनी ये फटफटी बेंच दो या मेरे साथ पैदल चला करो। दोहराने में फिर से ...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

लप्रेक ११

धूधली सी शाम में श्याम के कंधों पर सर रखकर बैठी थी। काफी देर तक की खामोशी को चीरते हुए। नीतू नें आसमान में आकृति दिखाते हुए कहा चलो न उस बादल के पीछे चले। एक बादल से दूसरे पर आइस-पाइस खेलें...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

लप्रेक १०

रेनॉल्ड्स 045 अब तो सफ़ेद से पीला पड़ गया हैं। करन नें उसकी नीली कैप भी बड़ी सम्हाल के रखी। पिछले बार आशीष से उसकी कट्टी भी इसी बात पर हुई थी। उसनें एक दिन के लिए पेन उधार मांगी थी। करन से दिल...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

लप्रेक ९

जैसे ही कार का दरवाजा बंद होता। अंगूठे और दोनों उंगलियां सीधा म्यूजिक की वॉल्यूम नॉब ही घुमाती। आवाज़ धीरे धीरे तेज़ होती की कैसेट को फ़ास्ट फारवर्ड लगा दिया जाता। अक्सर दोनों में इसी को लेकर ल...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

ख्वाब

रात तकिये नीचे सेलफोन में उँगलियाँ स्क्रॉल करते कब सो गया पता नहीं चला। आजकल बहुत नीचे चले गए हैं कुछ फोटोग्राफ्स, जो कभी मोबाइल की पहली ग्रिड में अपना सीना तानकर खड़े रहते थे। सपने सच बोलते...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

आओ भी

जान ली हो तो जान अब आओ भी, लेके जान तुम ए जान ना जाओ भी। तमन्ना है तेरी बिखरे जुल्फे सुलझाऊँ, हौले से उन्हें कान के पार लगाओ भी। लुका छिपी खेलता है देख ये चाँद मेरा, आज अमावस में भी टिप लगाओ...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

प्रेम में इस्तेहार

प्रेम में इस्तेहार बन बैठे हैं हम, भोर के अखबार बन बैठे है हम। सब पढ़ते चाय की चुस्की लेकर, हसरतों के औज़ार बन बैठे हैं हम। सुर्खियां जलकर ख़ाक हो गयी, सोच के गुलज़ार बन बैठे है हम। बदलता जाता न...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

चित्रकारी Vs कलमकारी।

एक जैसी लगती तेरी चित्रकारी और मेरी कलमकारी। लिखता हूं तो एहसास कैनवास हो जाता। अल्फ़ाज़ मेरी कूंची बन जाती। क्यूँ ना कभी ऐसा हो, तेरी स्केचिंग के कैनवास पर, मैं शब्दों के गौहर सजा दूं। ...
खामोशियाँ...!!! · 1Y ago

कार्बन

एक कार्बन रखकरएहसासों को गाढ़ा कर,कुछ सफ़ेद पन्ने पेउभरेंगी तारीखें।नज़र का टीका करके गोला मार देना। आजकल जमाना खराब है।- मिश्रा राहुल