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चिंतन मेरे मन का · 5M ago

यहाँ वहाँ...

टुकड़ो टुकड़ो में प्यार  अब तक ऐसी है अपनी यात्रा  एहसासों की  बहुत कम है मिश्रित मात्रा  फिर भी तुम्हारी कही  कई बातो में से  कुछ एक को रेखांकित किया है जिसे खुद ही बुदबुदाता हूँ  भाव...
चिंतन मेरे मन का · 5M ago

उदासी

उदासी.....   क्या रंग है उदासी का क्या रूप है उदासी का कौन सा मौसम है उदासी का उदासी में केवल रात ही नज़र आती है इसमें न धूप खिलती है न ही शाम होती है बस अन्धकार ही अन्धकार...
चिंतन मेरे मन का · 5M ago

अकेले में ...

अकेले में ... अकेले में रोने के बाद आँखों से दिखती है एक दुनिया जिसमे सब कुछ साफ़ साफ़ नज़र आता है ये वही दुनिया है जिसने मजबूर किया आंसुओं को जन्म लेने से लेकिन आँखों म...
चिंतन मेरे मन का · 5M ago

उत्तर

उत्तर ... मैं बहुत सवाल करता हूँ न ? खामोश रात के बीतते ही सुबह से लेकर शाम तक शोर प्रश्नों की बौछार!!! फिर भी तुम बिना तंग हुए स्थिति के मध्य्नज़र देती हो बेहतर उत्तर पर...
चिंतन मेरे मन का · 6M ago

अंधेरे में....

अंधेरे में.... तलाशता रहा अंधेरे में खुद को अंधेरे में वक्त को अंधेरे में किस्मत को मगर कोई उत्तर न मिल पाया अंधेरे से गुफ्तगू करने की ठान हिम्मत जुटा पुकारने लगा आँखे बड़ी...
चिंतन मेरे मन का · 6M ago

दो शब्द

दो शब्द  .... एक रास्ता दो राहें  अनजानी सी पग भरती खामोश कशिश मंजिल ढूंढती बेरुखी संजोये दर्द समेटे जड़े विलुप्त चलते चलते सुन सका केवल बेबसी  रुखा प्रेम ...
चिंतन मेरे मन का · 6M ago

मेरा पहाड़ ......

~मेरा पहाड़ ......~ पहाड़ो से मेरा रिश्ता कायम है जन्मभूमि की खुशबू रची बसी है रोम रोम में इसलिए उसकी पीड़ा भी महसूस कर पाता हूँ विकास के लिए हो या किसी आपदा का शिकार हो पहाड़ ने विनाश झेला हो...
चिंतन मेरे मन का · 6M ago

इंतज़ार में है ...

इंतज़ार में है ... शून्य को साक्षी मान जीवन के पथ पर निडरता से कदम रखते हुए चल तो दिया थावक्त और किस्मत से बेख़ौफ़अपनों में सुरक्षित समझलम्बी यात्रा का साजो सामान रखचल तो पड़ा थासत्य और ईमान की ...
चिंतन मेरे मन का · 7M ago

अंतिम रचना

अंतिम रचना.... अब समय आ गया है कलम को विराम देने का विचारों पर पूर्ण विराम लगाने का इस वर्ष कभी थोड़ा, कभी बहुत लिखा और क्या क्या न लिखा कभी उसने जो कहा या किया दिल ने जो ...
चिंतन मेरे मन का · 7M ago

वक्त का साया

वक्त का साया स्वर्ग नरक खाई से भी अलग कई गुना गहराई तक दफन कर देता है हर उम्मीद हर हौसले हर जज्बे की तड़फती चीख को मानवता दम तोडती हुई निवस्त्र कर देती है इंसानियत के ...