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नवोत्पल · 1W ago

#36# साप्ताहिक चयन 'वो अब भी इन्द्रधनुषी उम्मीद से है' / विमलेश शर्मा

***__________________________वो अब भी इन्द्रधनुषी उम्मीद से है___________________________________________________इस प्रविष्टि का पॉडकास्ट खुशबू और श्रीश की आवाज में EyeShree: Click by Dr. Sh...
नवोत्पल · 1W ago

MOM : एक माँ,स्त्री और एक परिवार के कर्ता की नजर से .... हेमा दीक्षित

हेमा दीक्षित'मॉम' फिल्म की कहानी कोई नई कहानी नहीं है ... हमने ऐसी कहानी पर कई फ़िल्में अलग-अलग नजरियों से देखीं हैं ...एक टीनऐज बच्ची के गैंगरेप उससे जुड़े परिवार परिस्थितियों हमारी न्यायिक...
नवोत्पल · 1W ago

#35# साप्ताहिक चयन 'बचे हैं सिर्फ हाँ या ना ' / अभिनव मिश्र

अभिनव मिश्रदौड़ते भागते सभ्यता कब मानवता का दामन छोड़ उसे दांव पर लगा बैठती है, एहसास ही नहीं होता. ऐसे में साहित्यिक हस्तक्षेप आवश्यक और निर्णायक होते हैं. इसी स्वर की कविता आज की नवोत्पल साह...
नवोत्पल · 3W ago

#34# साप्ताहिक चयन 'छद्म संवेदनाओं को भुना लो साथी' / विहाग वैभव

विहाग वैभव सम्वेदनायें किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का सबसे महत्त्वपूर्ण पहलू हैं। यही उसके मूल्यों का निर्धारण करती हैं और यही हैं जो इंसान को इंसान बनाती हैं। पर तब क्या हो कि जब यही सम्वेदन...
नवोत्पल · 4W ago

#33# साप्ताहिक चयन 'कविता की खोज में' / अभिषेक आर्जव

कविता की खोज में ______________________________________________जिस दिन सब कुछ अच्छा रहता ह...
नवोत्पल · 1M ago

#32# साप्ताहिक चयन 'मुक़दमा' / 'पूनम विश्वकर्मा '

पूनम विश्वकर्मा 'वासम'साहित्य में यूं तो  आदिवासी स्वर की कविताएं रची जा रही है , पर शायद दूर  कहीं वातानुकूलित माहौल में, बैठ कर लिखने वाले कवि इस आदिवासी मर्म को लिख तो पाते हैं पर पाठक उन...
नवोत्पल · 1M ago

#८# दिल की डायरी: मन्नत अरोड़ा

दिल की डायरी: मन्नत अरोड़ा न्याय और कानून जैसा कुछ नहीं रहा अब।बस सावधान इंडिया और सी.आई. डी में ही एक बाल से भी मुजरिम तक पहुँच जाते हैं।यहाँ सारे सबूत भी रख दो तो पुलिस इन्क्वायरी के बहाने ...
नवोत्पल · 1M ago

#31# साप्ताहिक चयन: 'गाँव' / 'मिथिलेश कुमार राय '

धर्म की सेकुलर समझ जहाँ उसे व्यक्तिगत स्तर पर जाकर करीब करीब आध्यात्मिक उन्नयन तक ले जाती है वहीँ बाजार ने व्यक्तिवाद की शह पाकर आस्थाएं भी रिप्रोड्यूस करने की क्षमता ईजाद कर ली है l ऐसे में...
नवोत्पल · 1M ago

#30# साप्ताहिक चयन: 'जामुन का भूत ' / 'शायक आलोक'

शोषण की इंतिहा प्रतिरोध के अनन्य विधाएं आविष्कृत करती रही है l शहर या गाँव का विभाजन इसमें आड़े नहीं आता l यह सर्वकालिक व सर्वव्यापक है l धर्म ने थककर अपने उमर भर की कमाई राजनीति को सौपीं और ...
नवोत्पल · 1M ago

#७# दिल की डायरी: मन्नत अरोड़ा

मन्नत अरोड़ा दिल की डायरी: मन्नत अरोड़ा कुछ लोगों को आदत सी होती है पहले गड्डा खोद के छलांग लगाने की और फिर बचाओ-बचाओ कहने की। बस यही कुछ आदत मेरे पति को भी थी। सो मेरे बहुत बार कहने पे भी न त...