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नवोत्पल · 1M ago

#45 # साप्ताहिक विशिष्ट चयन: "एक झूठ बनाम हैप्पी एंडिंग" /रश्मि भारद्वाज

रश्मि भारद्वाजभाषा भाव का दामन पकड़ हिलोर ले सरस सलिला रहती है. उसके अनायास प्रवाह को  समक्ष के असमतल उच्चावच रोक नहीं पाते. एक समय था जब हिंदी साहित्य में यथार्थपरक लेखन की परम्परा ने जोर पक...
नवोत्पल · 2M ago

#44 # साप्ताहिक चयन: "एक भविष्य जो अँधेरे में उग रहा है" / संदीप नाईक

संदीप नाईक एक भविष्य जो अँधेरे में उग रहा है____________________________कितना दुर्भाग्यशाली होता है वो गांवजहां ना नीम हो, ना बबूल
नवोत्पल · 2M ago

हमारे वो तो हमसे प्यार ही नहीं करते .... : कहानी (2) - रचना भोला 'यामिनी'

हमारे'वो'क्या कभी उनके सर को गोद में रख कर हौले-हौले सहलाया/ क्या कभी उनकी बंद पलकों के नीचे उंगलियों से घेरे बनाते हुए यह जानना चाहा
नवोत्पल · 2M ago

#43 # साप्ताहिक चयन: "छलिया" / जया यशदीप

जया यशदीपभीग जाये तन मन प्रेम में विह्वल फिर तो क्या छल और क्या छलिया !प्रेम जिसमें गणित हारने को विवश हो जाय और दर्शन पालना बन पेंग लगाये, इसमें एक और एक का जोड़ एक ही हो, फिर अक्षर चूकने लग...
नवोत्पल · 2M ago

आना-पाई दमड़ी-वमड़ी तक सब वसूल है- 'बरेली की बर्फी' : हेमा दीक्षित

हेमा दीक्षितक्या आपने 'बरेली की बर्फी' खाई है ... नहीं अब तक नहीं तो जाईये जल्दी से खा लीजिये नहीं तो सच मानिये जिनगी बेकार है ... बहुत दिनों बाद हँस-हँस कर दोहरे हो जाने वाली कोई फिल्म आई ह...
नवोत्पल · 2M ago

'बेअकल लड़की ' : कहानी (1) - रचना भोला 'यामिनी'

आदरणीया रचना जी एक बेहद सक्रिय जीवन उल्लास में रची-पगी लेखिका हैं l फेसबुक पर आपके लिखे 'ल...
नवोत्पल · 2M ago

#42 # साप्ताहिक चयन: "अगले जन्म की कविता" / नीलोत्पल मृणाल

युवा होना ही अनन्य जिम्मेदारियों से भर देता है, जो समझ का एक स्तर हो l तन मन का युवा, जोश और कर्तव्य के धन से अपने आस-पास बिना निरपेक्ष रहे हर उस भूमिका में आकर उत्तर देगा जो उस समय का उस यु...
नवोत्पल · 3M ago

#41 # साप्ताहिक चयन: "बू...." / डाॅ जोशना बैनर्जी आडवानी

डाॅ जोशना बैनर्जी आडवानीबंदिशें बेमुरव्वत होती हैं lइस दौर में या बीते हुए दौर में या फिर आगे आने वाले दौर में , दौर कोई भी रहा हो एक चीज़ जो नहीं बदलती, वो है बन्दिशें। इंसान पर समाज की बन्द...
नवोत्पल · 3M ago

#40# साप्ताहिक चयन 'आस' / प्रदीप कुमार '

प्रदीप कुमारयुवा कवि प्रदीप कुमार एक सहज सहृदय कवि हैं l आपकी कवितायेँ बड़ी ही सरलता से जीवन राग सुनाती हैं l नवोत्पल साप्ताहिक चयन की इस प्रविष्टि पर अपना अभिमत दे रहे हैं श्री अमित कुमार श्...
नवोत्पल · 3M ago

डेढ़ इश्किया .......नारी का डेढ़ विमर्श

 श्री सुरेन सिंह श्रम प्रवर्तन विभाग में वरिष्ठ अधिकारी हैं पर मन रमता है कला और साहित्य  में। थोड़ी देर से    ही सही पर फिल्म डेढ़ इश्किया पर  लिखी उन  की ये  समीक्षा पढ़ने योग्य  है ।  [मॉडरे...