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नव अंशु sahityak nungar chahatgar rachna

Hindi - Story, Poetry
http://navanshu.blogspot.in/
नव अंशु · 1Y ago

यदि पेड़ के चक्के होते

बाल कविता-7यदि पेड़ के चक्के होतेयदि पेड़ के चक्के होतेमैं भी शहर से हो आताचाट समौसा इडली डोसाकिसी होटल से खा आतासुबह सुबह डाली पर चढ़स्कुल तक मैं पहुँच जाताछुट्टी होती शाम को तोघर को वापस आ...
नव अंशु · 1Y ago

धरती मैया

धरती मैया धरती मैयाकरती हर पल ता ता थैयातनिक नहीं तुम थकती होदिन भर चलती रहती होजैसे चलते चंदा मामाजैसे चलती घड़ी हमारीजैसे चलते लट्टू भैयावैसी हीं है चाल तुम्हारीतुम्ही रात-दिन करती होतनिक ...
नव अंशु · 1Y ago

इच्छा है कि

बाल कविता-5इच्छा है किइच्छा है कि चाँद पर जा करछोटा सा एक घर बना कररहूँ वहाँ मैं शान सेबातें करू आसमान सेतारे संग मैं लूडो खेलूँग्रहों के संग लगाऊँ रेसपिकनिक मैं मनाऊँ जाकररोज रात परियों के ...
नव अंशु · 1Y ago

मेरे डैडी जी

4. मेरे डैडी जीसबसे प्यारे सबसे सच्चे मेरे डैडी जीलगते मुझको सबसे अच्छे मेरे डैडी जीचॉकलेट टॉफी लाते हैंपिकनिक पर ले जाते हैंसन्डे को शॉपिंग करबा करफिल्म भी वो दिखाते हैंमेरे संग बनते हैं बच...
नव अंशु · 1Y ago

हिन्दी बाल कविता- शेर जंगल का राजा है

1. शेर जंगल का राजा हैशेर जंगल का राजा हैकितना मोटा ताजा हैसुबह को करता एक्सरसाइजदेखो तो सीने का साइजऊँची लम्बी दौड़ लगाताफिटनेस उसकी खूब लुभाताफुर्ती खूब दिखाता हैशेर जंगल का राजा हैगुस्से ...
नव अंशु · 1Y ago

मच्छर रानी

बाल कविता-247🌷मच्छर रानी🌷मच्छर मच्छर मच्छर रानीतोरे लेल छै मच्छरदानीसाँझे पहरसँ तूँ आबै छेंभिनभिन क' गीत गाबै छेंहोइए सबकेँ बड परेशानीलोल तोहर छौ बड धरगरपीबै छेँ तूँ शोणित हड़बड़मोन पड़ैए दर्दस...
नव अंशु · 1Y ago

बरियाती

बाल कविता-246बरियातीछमछम बरसै बरसा रानीबेंग चलल बरियाती यौआगू दुल्हा पाछू सब छैतानि चलल बरसाती यौपात बिछा क' छल तैयारखूबै लेल सरियाती यौएलै अन्हर एहन तखनेगेल मिझाइये बाती यौ
नव अंशु · 1Y ago

धियापुताक फकरा 1

पसरल राहरि छलै पालपरखेलकै तकरा छोटकी मैनाभेलनि तामसे लहलह बाबादौड़लनि लेने नम्हर पैना
नव अंशु · 1Y ago

ई अंबर चाही

बाल कविता-245ई अंबर चाहीनै पिज्जा नै बर्गर चाहीनै कुरकुरे कड़गर चाहीहम माँगै छी एतबे बौआउड़ै लेल ई अंबर चाहीनै सोनाक पिंजरा चाहीनै टिकड़ी नै टिकड़ा चाहीअपने हाथक तोड़ल बौआनीमक फर तीतगर चाहीनै मिर...
नव अंशु · 1Y ago

लप्रेक

- हाइ रे दैवा, आइ मरदाबा साँझे कोना आबि गेलै !- हे गै आइसँ दारू बन्द भ' गेलै ने तेँ...-ले बलैया, ई सरकरबो हमरे टेंशन बढ़ा देलकै ।एकरा कतौ पीने बिना रहि हेतै जे ।-तेँ ने आइ जल्दीए तोरा लग आबि ...