Add Your Blog | | Signup
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'मीठे एहसास'..

#जां..."सुना है..तुम 'लव-गुरु' हो..पल में ही लोगों की मुश्किलें हर देते हो..कोई ब्रेक-अप हो..या..हो इश्क़ में मोराल डाउन..कोई टीनएजर हो..या..मिड २०ज़ के डिलेमा वाला..कोई अधेड़ तलाशता हो साथी नय...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'चलना ही ध्येय हो..'

..."चलते चल, पथिक..डगर का अस्तित्व..तुझसे ही होगा..बाँधते चल, नाविक..लहर का सत्त्व..तुझसे ही होगा..संवारते चल, चितेरे..महल का तत्व..तुझसे ही होगा..ढालते चल, विद्यार्थी..पहल का रक्त..तुझसे ही...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'अक्षरों के पल्लवन..'

..."स्मृति-पटल पर..पोषित अंतर्मन पर..ओष्ट-धरा पर..नेत्र-द्वार पर..अक्षरों के पल्लवन..स्नेह के प्याले..गति का मान..लय का श्रम..लक्ष्य का भान..संबंधों के स्वास्थ्य..माधुर्य से परिपूर्ण रहें..क...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'इस साल की दुआ..'

‪#‎जां‬..."कुछ रिश्तों की नींव..बिन मिले ही गहरा जाती है..प्रत्यक्ष की चाह भी..लोप हो जाती है..कुछ पल गहरा जाते हैं..मिलन की आस..अधूरी..अधपकी..वहशत..जीने की प्यास..#जां..मेरी रूह पे निशां गह...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'सितारों के दामन..'

..."दफ़न होने को बेक़रार बैठी हूँ..मय्यत पे अपनी..बेज़ार बैठी हूँ..चाहा था..बेहिसाब बेख़ौफ़..तुझे..साया-ए-उम्मीद..हार बैठी हूँ..फ़िक्र न करना..ए-हमजलीस..गिलाफ़-ए-रूह..मार बैठी हूँ..करो रुकसत..ख्वाह...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'क़ातिल आशिक़..'

..."हाथ की लकीरों पे..खुदा इक नाम था..जाने ता-उम्र तलाश को..आया कैसे आराम था..तुम आये थे क़रीब..इतना ज़्यादा..निहारता-संवारता चला..किस्मत का प्यादा..नुमाइश-ए-ज़िन्दगी..गुमनाम आवारा-सा मैं..फ़लसफ़...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'चाहत के जुर्माने..'

..."रूह पे चला दे..तेरे कॉम्पस का..पॉइंटेड पॉइंट..खेंच मनमर्ज़ी से..छोटे-बड़े..बेहिसाब सर्कल्स..सहने दे ज़ख्म..हल्के-गहरे..सुबहो-शाम..लिखे थे जो..वस्ल-ए-रात..मेरे नाम..!!"...--चाहत के जुर्माने....
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'दौड़-ए-ज़िन्दगी..'

..."वक़्त की आँधी थी..औ' मैं अकेला..चलने को मजबूर..कदमों का रेला..उठा दिल..सहलायी रूह..समेट अपने..एहसासों का ठेला..मुमकिन कहाँ..मसरूफ़ियत यहाँ..फ़ैला हर दश्त..अरमानों का मेला..बिछड़ गए..यार मेर...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'वीकैंड-ख़ुमार..'

..."मेरे जानेमन..तेरी हर अदा पे प्यार आता है..ख़ता पे अपनी ख़ुमार आता है..साथ को तड़पता हर पल..देखिये..उनका जवाब एक बार आता है..मसरूफ़ जानेमन..सुबहो-शाम..आपको भी हमारा ख्याल आता है..चलो न..ख़त्म ...
प्रियंकाभिलाषी.. · 1Y ago

'दोस्ती बचपन वाली..'

..."कभी-कभी बहुत याद आते हो..दिल के गहरे तार छेड़ जाते हो..सुनो, मिला करो न आते-जाते..दिल को इक तुम ही भाते हो..महके ता-उम्र..दोस्ती बचपन वाली..दस्तक साँसों पे..लगा जाते हो..!!"...--सलाम..इस ...