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पार्श्व स्वर रूह की आवाजों के लिए

Hindi - Poetry, Feminism, Hindi
http://poojasharmarao.wordpress.com/
पार्श्व स्वर · 1Y ago

एहसां

इतने लम्बे गिले ,इतनी कम ज़िन्दगी ,और फिर हरेक के दिल में मेरे लिए शिकायतों के सैंकड़ों कंकड़। उफ़ ये बोझ , ये उलझनें , काश लफ़्ज़ों के दरिया में डुबोये जा सकती तन्हाई…….. दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है क...
पार्श्व स्वर · 1Y ago

दर्द के नाम एक और नगमा

ख़ुशी कभी इतने पीछे छूट जाती है , कि झूठ लगने लगती है। जो तूफ़ान में हाथ नहीं थामते उनके सब दिलासे मज़ाक लगते हैं। ग़म एक पारखी है , दर्द की बर्दाश्त भी परखता है और अपनों का साथ भी। बहुत अर्से ब...
पार्श्व स्वर · 1Y ago

पिंजरा,पंछी,हवा

दाग अच्छे हैं , चोट ,ठोकर जितना सिखा देती है उतना ख़ुशी का हौसला कहाँ। मैं हमेशा कहती हूँ हमेशा कुछ नहीं रहता , इसलिए तेज़ बुखार से पैदा हुए भ्रम भी भूलना नहीं चाहती। धोखे भी अच्छे हैं , तस्वी...
पार्श्व स्वर · 1Y ago

निर्वासित

पिछले दिनों टीवी पर दो फिल्में बार-बार देखी – Lisa Genova की मश्हूर नावेल Still Alice पर आधारित इसी नाम की फिल्म और कई सालों से मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक Castaway. दोनों बिलकुल अलग कहान...
पार्श्व स्वर · 1Y ago

त्रासदी

बचपन में बड़े हो जाना इश्क़ की उम्र में मौत की तमन्ना करना अच्छी यादें धुंधली पड़ जाना वक़्त का हिसाब भूलते जाना सब त्रासदी हैं साल दर साल कैलेंडरों पर लाल पेन से तारीखें काटना ज़िन्दगी का काउंटड...
पार्श्व स्वर · 1Y ago

दिल एक उम्मीद का क़तरा है

एक पसंदीदा चश्मा जब से टूटा है , कुछ चेहरे और साफ दिखने लगे हैं।  हर रिश्ता एक नरम ऊन के स्वेटर जैसा , एक भी धागा खिंचा तो सारे धागे उधड़ने लगते है।  ज़िन्दगी का हर चिथड़ा कभी एक नया स्वेटर था।...
पार्श्व स्वर · 2Y ago

उदासियों का मौसम

ये शहर एक लम्बा उपन्यास है , इसके लाखों सब-प्लाट है , जो कब शुरू हुए ,कब खत्म कोई हिसाब नहीं। ये एक लड़ाई का मैदान है जिसने मरने वालों की गिनती छोड़ दी है। सर्दियाँ उदासियों का मौसम हैं , मेट्...
पार्श्व स्वर · 2Y ago

कसमें ,वादे ,प्यार ,वफ़ा ………

दर्द क्या ज़्यादा है- इंतज़ार या मजबूरी। Poet होने की मजबूरी है मेटफर्स में बातें करना और इंतज़ार रहना उस एक लफ्ज़ का जो ज़हन में जोंक की तरह चिपक जाए।  मेरे पहाड़ी शहर में जब जोंके पैरों से चिपकत...
पार्श्व स्वर · 2Y ago

Nayantara’s Necklace

जब छोटी थी तो घर में था एक बड़ा काला टरर -टरर गोल डायल वाला फ़ोन , उसका चार डिजिट्स वाला नंबर मैं पक्के रट्टू तोते की तरह दोहराती थी।  घंटी बजती तो घर के किसी भी कोने में क्यों न हूँ , भाग कर ...
पार्श्व स्वर · 2Y ago

बेड़ियां

तुमने बहुत ऊंची कर ली है अपने आसपास की दीवार मेरी आवाज़ टकराकर बिखर गयी है … उन किरचों को सँभालते हुए छिल गयी है मेरी रूह इंतज़ार कभी ज़िन्दगी से लम्बा हो गया तो याद रखना कुछ लम्हे एक शीशे में ...