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मेरी बात · 1Y ago

सड़क सुरक्षा पर हावी कारों की बिक्री का गणित

जिस तरह भारतीय बाजार में मध्‍यम वर्ग काे लुभाने के लिए कारों की कीमतों में कटौती करने और सस्‍ती से से सस्‍ती कीमत की कारें बनाने की होड़ लगी है, उसने आज सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिये ह...
मेरी बात · 1Y ago

दाना चुगने आया बंदर

पक्षियों की भूख-प्‍यास बुझाने का जो सर्वव्‍यापी अभियान पर्यावरणप्रेमियों ने छेड़ रखा है, उससे प्रभावित होकर हम भी मिट्टी के दो छोटे प्‍याले ले आये। एक में पानी और एक में दाल और चावल के दाने ...
मेरी बात · 1Y ago

मुझको मेरी नज़र से ही गिरा रहे हैं लोग।

मुझको मेरी नज़र से ही गिरा रहे हैं लोग।मैं देखता हूँ बौने होते जा रहे हैं लोग।सूरज से धूप छीनकर मेरे हिसाब की,मुझको ही रोशनी दिखा भरमा रहे हैं लोग।चरखा थमा के मुझको, मेरा तन उघाड़कर,मेरी ही ...
मेरी बात · 1Y ago

शौर्यांजलि - एक अद्भुत सैन्‍य प्रदर्शनी

भारत और पाकिस्‍तान के बीच 1965 को हुए युद्ध के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस युद्ध को जहॉं राजनेताओं के सही-गलत फैसलों के लिए याद किया जाता है वहीं सैनिकों की व्‍यक्तिगत और सामूहिक क्षमता के ल...
मेरी बात · 1Y ago

उ.प्र. में पूर्णकालिक कार्य कर रहे हैं अंशकालिक अनुदेशक

सर्व शिक्षा अभियान के अन्‍तर्गत भारत के अन्‍य राज्‍यों की भॉंति उत्‍तर प्रदेश में भी परिषदीय उच्‍च प्राथमिक विद्यालयों में अंशकालिक अनुदेशकों (Part Time Instructor) की नियुक्ति की गयी है ज्ञ...
मेरी बात · 1Y ago

प्राचीन भारत के विश्‍वविद्यालय

भारत में प्राचीन काल से ही शिक्षा एवं शिक्षण को पवित्र कार्य माना जाता रहा है। शिक्षा को मनुष्‍य के सर्वांगीण विकास के लिए परमावश्‍यक बताया गया है। भारत में गुरु की महत्‍ता मॉं-बाप से भी बढ़...
मेरी बात · 1Y ago

गर्मी की छुट्टियां

शुक्रवार को मेरे बच्‍चों के स्‍कूल में गर्मी की छुट्टियों की घोषणा हो गई। छुट्टी क्‍या हुई, बच्‍चों के मन में लड्डू फूटने लगे। शाम को ऑफिस से घर पहुँचने पर पता चला कि हमारे सात वर्षीय साहबजा...
मेरी बात · 1Y ago

तुमसे मिलने के बहाने तलाशने होंगे

मेरी बात · 1Y ago

शहर बीमार हूँ मैं हॉफता हूँ

गूगल चित्र से साभार   हजारों मील हर दिन नापता हूँ।कभी कायम कभी मैं लापता हूँ।।मैं सपनों का उमड़ता इक भँवर हूँ,तरक्‍की या तबाही का पता हूँ।है किसमें कितनी हिम्‍मत, कितनी कुव्‍वत,मैं सबको तोलत...
मेरी बात · 1Y ago

ग़ज़ल

कभी बहुत ही अकेला हूँ मै, कभी तो खुद में ही मेला हूँ मैं। कभी हूँ ठण्‍डी हवा का झोंका,कभी तो आब का रेला हूँ मैं।कभी हूँ खुशियों  का खिलता गुलशन,कभी दु:खों का झमेला हूँ मैं।जहां के रंग सभी दे...