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सरोकारनामा · 1W ago

सुशोभित सक्तावत के सवालों की आग बहुतों को जला रही है

बहुत कम लोग हैं हमारे जीवन में जिन की भाषा पर मैं मोहित हूं । संस्कृत में  बाणभट्ट और कालिदास । रूसी में टालस्टाय । हिंदी में कबीरदास  , तुलसीदास , हजारी प्रसाद द्विवेदी , अज्ञेय , निर्मल वर...
सरोकारनामा · 1W ago

तो क्या कुमार विश्वास के परोसने से बच्चन की कविताओं का स्टारडम गड्ढे में जाता रहा था

मुझे लगता है कि कुमार विश्वास द्वारा यू ट्यूब पर हरिवंश राय बच्चन की कविता परोसने से हरिवंश राय बच्चन की कविताओं का स्टारडम गड्ढे में जाता रहा था , इसी लिए अमिताभ बच्चन ने ऐतराज जताया होगा ।...
सरोकारनामा · 1W ago

अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर कुछ लोगों को मार डालते हैं तो कम से कम मुझे आश्चर्य नहीं होता

जिस कश्मीर में मानवाधिकार के नाम पर ज्यूडिशियली खुद संज्ञान ले कर एक पत्थरबाज आतंकी को दस लाख का मुआवजा देने की सरकार को सिफ़ारिश करती हो उस कश्मीर में अगर अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला कर क...
सरोकारनामा · 2W ago

किसी मुस्लिम या दलित के साथ हादसा या हत्या होने पर पूरे देश में एक आंदोलन क्यों खड़ा हो जाता है ?

किसी भी के साथ कोई हादसा या किसी भी की हत्या सर्वदा दुखद ही होता है । वह चाहे किसी भी समाज का , किसी भी वर्ग का हो । लेकिन आप ने कभी गौर किया है कि किसी मुस्लिम या किसी दलित के साथ हादसा होन...
सरोकारनामा · 3W ago

आज की तारीख़ में कौन समाज है जो मनु स्मृति से भी चलता है ?

मनु राजा थे। क्षत्रिय थे । मनुस्मृति भी उन्हों ने ही लिखी । लेकिन यह जहर से भरे कायर जातिवादी, मनुवाद के नाम पर ब्राह्मणों को गरियाते हैं। जानते हैं क्यों ? इस लिए कि ब्राह्मण सहिष्णु होत...
सरोकारनामा · 3W ago

एन डी टी वी मतलब जहर और नफ़रत की पत्रकारिता

एन डी टी वी का एजेंडा अब न्यूज़ नहीं है । एन डी टी वी का एजेंडा अब कभी मुस्लिम , कभी दलित के बहाने समाज में जहर और नफ़रत घोलना है । एन डी टी वी की तमाम रिपोर्टें बता रही हैं कि भारत में मुसलम...
सरोकारनामा · 3W ago

धर्म भले ही अफ़ीम हो मगर आस्था तो जलेबी है

अपने गांव में पूजा-पाठ करते मैनेजर पांडेय हिंदी के मार्क्सवादी लेखक और जे एन यू में प्रोफेसर रहे मैनेजर पांडेय के पूजा पाठ की एक फ़ोटो फ़ेसबुक पर विमर्श का बढ़िया माध्यम बनी है । बहुत से म...
सरोकारनामा · 4W ago

बोनसाई बरगद

गमले के बोनसाई भी  अपने को जब सचमुच का बरगद समझ कर  बोलने लगते हैं तो कितने हास्यास्पद हो जाते हैं ,  कितने तो बौने दीखते हैं ,  वह बरगद होने के गुरुर में समझ नहीं पाते ।  समझ नहीं पाते कि ...
सरोकारनामा · 1M ago

उन का सुख

पेंटिंग : बी प्रभा   बहुतायत लोगों की हर खुशी में गिनती के कुछ लोग दुःख खोज लेने के लिए अभिशप्त हैं ।    गज़ब यह कि वह यह भी चाहते हैं कि उन के दुःख में  सभी लोग दुखी हो ...
सरोकारनामा · 2M ago

अम्मा की अनमोल सखियां

तिवराइन इया  अम्मा की सखियों की जब याद करता हूं तो उन की तीन सखियां याद आती हैं । बहुत-बहुत याद आती हैं । जिन में अम्मा का साथ देने के लिए अब एक ही सखी जीवित हैं । लेकिन वह भी दिल्ली में ...