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सरोकारनामा · 3W ago

यह सादगी और ईमानदारी भरी परंपरा काश कि सभी राजनीतिज्ञ अपनाते

नीतीश कुमार जब नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्य मंत्री बने थे तो न्यूज़ चैनलों ने उन के गांव से जो घर दिखाया था उन का , वह न सिर्फ़ एक साधारण किसान का घर था बल्कि नीतीश कुमार की ईमानदार...
सरोकारनामा · 1M ago

यह तो सही है कि आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में दंगे नहीं होने देंगे

उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री आदित्यनाथ ने जो कल लोक सभा में तत्कालीन उर्वरक मंत्री सुरजीत सिंह बरनाला का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्हों ने गोरखपुर मंडल में दंगे नहीं होने दिए , किसी व्यापारी य...
सरोकारनामा · 1M ago

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव परिणामों को रद्द कर दिया

आख़िर मायावती और अखिलेश यादव की व्यथा-कथा के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड  के चुनाव परिणामों को रद्द कर दिया है । यह भी कि अब अगला चुनाव ई वी एम मशीन के बिना होगा । चुनाव ...
सरोकारनामा · 1M ago

काश कि उत्तर प्रदेश के यादव लैंड या दलित लैंड बनने पर भी लेखक मित्रों ने कभी मुह खोला होता

काश कि उत्तर प्रदेश के यादव लैंड या दलित लैंड बनने पर भी लेखक मित्रों ने कभी मुह खोला होता । मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सांस ली होती । एकपक्षीय सेक्यूलरिज्म का पहाड़ा न पढ़ा होता तो शायद यह नत...
सरोकारनामा · 1M ago

काश कि उत्तर प्रदेश के यादव लैंड या दलित लैंड बनने पर भी लेखक मित्रों ने कभी मुह खोला होता

काश कि उत्तर प्रदेश के यादव लैंड या दलित लैंड बनने पर भी लेखक मित्रों ने कभी मुह खोला होता । मुस्लिम तुष्टिकरण पर भी सांस ली होती । एकपक्षीय सेक्यूलरिज्म का पहाड़ा न पढ़ा होता तो शायद यह नत...
सरोकारनामा · 1M ago

एक औरत की जेल डायरी

दुनिया भर की महिला कैदियों के लिए कि उन का जीवन सुंदर हो. भूमिका   एक अनाम और निरपराध औरत की जेल डायरी करे कोई, भरे कोई। एक पुरानी कहावत है। एक बात यह भी है कि कई बार आंखों देखा और का...
सरोकारनामा · 2M ago

फागुन धड़कता देह की हर पोर में तुम कहां हो

सुलोचना वर्मा की फ़ोटो ग़ज़ल  देह में संगीत बजता है मनुहार का तुम कहां हो फागुन धड़कता देह की हर पोर में तुम कहां हो एक तितली है एक कोयल की आहट और एक मैं आम्र मंजरियों में आ गई है सुगं...
सरोकारनामा · 5M ago

जब नाबालिग हो कर भी मैं ने ढेर सारे वोट डाले

वह संपूर्ण क्रांति के दिन थे । दूसरी आज़ादी के दिन थे । जे पी की आंधी के दिन थे । गांधी , लोहिया और जय प्रकाश जैसे प्रकाश बन कर समाज में छा गए थे । यानी 1977 के वह चुनावी दिन थे । तब हम विद्य...
सरोकारनामा · 5M ago

दीप्तमान द्वीप में सागर से रोमांस

कोलंबो के होटल माऊंट लेविनिया के टैरेस पर  सागर की सरग़ोशी  आज दस दिन हो गया है श्रीलंका से लौटे हुए लेकिन कोलंबो में सागर की लहरों का सुना हुआ शोर अभी भी मन में शेष है । थमा नहीं है । यह श...
सरोकारनामा · 6M ago

ठाकुर साहब

<!--[if gte mso 9]> <![endif]--> ठाकुर साहब  इंद्र भूषण सिंह ठाकुर साहब को मेरे फार्म पर रहते लगभग बीस साल हो गये पर मुझसे यदि कोई उनका पूरा नाम पूछे तो शायद मै त...