Add Your Blog | | Signup
सरोकारनामा · 2d ago

गोदी मीडिया का स्लोगन दे कर प्रणव रॉय खुद काले धन की गोद में न बैठे होते तो शायद यह दिन न आता

अंध सेक्यूलरिज्म का झांसा राजनीति से उतर कर मीडिया में भी अपनी परिणति पर आ गया है । तो भी एन डी टी वी का इस तरह बिक जाना दुखद है । भारतीय पत्रकारिता का यह दुर्भाग्यपूर्ण दिन है । लेकिन गोदी ...
सरोकारनामा · 1W ago

और कई दिन तक मुनमुन मेरे दिल- दिमाग में चहलक़दमी करती रही

दिव्या शुक्ला आप लोग चाहते हैं कि मैं जियूं और अपने पंख काट लूं । ताकि अपने खाने के लिए उड़ कर दाने भी न ले सकूं। मैं पति छोड़ दूंगी पर नौकरी नहीं ! तल्खी भरे यह सख़्त वाक्य --अपने स्वार्थी ...
सरोकारनामा · 1M ago

तब बुखारी ने अटल जी को धमकी दी थी कि देश में आग लग जाएगी

शाही ईमाम सैयद इमाम बुखारी तब के दिनों अटल बिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री थे ।‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ की तत्कालीन सदस्या सईदा सैयदेन हमीद ने अपनी रिपोर्ट ‘वायस ऑफ वायसलेस’ में देश की मुस्लि...
सरोकारनामा · 1M ago

मीना कुमारी लेकिन इस हलाला से टूट सी गई थीं

बहुत कम लोग जानते हैं कि मशहूर अभिनेत्री मीना कुमारी भी इस तिहरे तलाक़ में टूट गई थीं । बल्कि तिहरे तलाक़ ने कम हलाला ने उन्हें ज़्यादा तोड़ दिया था । उन का जिस्म और जां तनहा तनहा हो गया था तो अ...
सरोकारनामा · 1M ago

मत लड़ा करो मेरी जान , मत लड़ा करो

फ़ोटो : अनिल रिसाल सिंह  पति क्या कम पड़ जाता है जो तुम मुझ से भी लड़ने लगती हो बात-बेबात मधुमक्खी की तरह मत मिला करो शहद की तरह मिला करो फूल की तरह खिला करो मेरी जान , जान में जान बन कर...
सरोकारनामा · 1M ago

कभी थीं नीरा यादव भी ईमानदार जब वह नीरा त्यागी हुआ करती थीं

पुलिस हिरासत में नीरा यादव  कभी थीं नीरा यादव भी ईमानदार जब वह नीरा त्यागी हुआ करती थीं । उन की ईमानदारी के नाम पर चनाजोर गरम बिका करता था । उन दिनों जौनपुर में डी एम थीं । जौनपुर में आई...
सरोकारनामा · 1M ago

मैं ज़फ़र ता-ज़िंदगी बिकता रहा परदेस में अपनी घरवाली को एक कंगन दिलाने के लिए

अजी बड़ा लुत्फ़ था जब कुंआरे थे हम तुम , या फिर धीरे धीरे कलाई लगे थामने , उन को अंगुली थमाना गज़ब हो गया ! जैसी कव्वालियों की उन दिनों बड़ी धूम थी ।  उस किशोर उम्र में ज़फ़र की यह दोनों कव्वाली स...
सरोकारनामा · 1M ago

प्रतिबद्धता के नाम पर साहित्यकारों को अपनी इस दोगलई से हर हाल बाज आना चाहिए

‘साहित्य का उद्देश्य’ में प्रेमचंद ने लिखा था, ‘हमें सुंदरता की कसौटी बदलनी होगी।’ तो बदली स्थितियों में भी इस कसौटी को बदलने की ज़रुरत आन पड़ी है। इस लिए भी कि प्रेमचंद इस निबंध में एक और बात...
सरोकारनामा · 2M ago

सुशोभित सक्तावत के सवालों की आग बहुतों को जला रही है

बहुत कम लोग हैं हमारे जीवन में जिन की भाषा पर मैं मोहित हूं । संस्कृत में  बाणभट्ट और कालिदास । रूसी में टालस्टाय । हिंदी में कबीरदास  , तुलसीदास , हजारी प्रसाद द्विवेदी , अज्ञेय , निर्मल वर...
सरोकारनामा · 2M ago

तो क्या कुमार विश्वास के परोसने से बच्चन की कविताओं का स्टारडम गड्ढे में जाता रहा था

मुझे लगता है कि कुमार विश्वास द्वारा यू ट्यूब पर हरिवंश राय बच्चन की कविता परोसने से हरिवंश राय बच्चन की कविताओं का स्टारडम गड्ढे में जाता रहा था , इसी लिए अमिताभ बच्चन ने ऐतराज जताया होगा ।...