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सादर ब्लॉगस्ते! · 1M ago

हास्य व्यंग्य : म्हारे गुटखेबाज किसी पिकासो से कम न हैं

     अपने देश में कला की तो कोई कद्र ही नहीं है। आए दिन कोई न कोई ऐसा सरकारी फरमान जारी होता रहता है, जो कला का मानमर्दन करने को तत्पर रहता है। अब गुटखेबाज कलासेवी जीवों को ही ले लीजिए। कलास...
सादर ब्लॉगस्ते! · 2M ago

युगांडा का स्टेट हाऊस यानि सत्ता का एक मात्र केंद्र

ये है युगांडा के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास यानि स्टेट हाउस (State House) या राष्ट्रपति भवन...वैसा ही जैसा दिल्ली में हमारा राष्ट्रपति भवन है या फिर अमेरिका का व्हाइट हाउस. राजधानी कम्पाला...
सादर ब्लॉगस्ते! · 2M ago

जिंजा : जहां गांधी जी के भी प्राण बसते है

                                              My Rwanda-Uganda visit with Vice President: Oneजैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि मुझे उपराष्ट्रपति श्री मो हामिद अंसारी जी के साथ 19-23 फरवरी 2017 ...
सादर ब्लॉगस्ते! · 3M ago

सहिष्णुता की खोज (पुस्तक समीक्षा)

       इन दिनों अन्य विधाओं के अलावा व्यंग्य पर ज्यादा काम हो रहा है। यह खबर व्यंग्य यात्रियों के लिए अच्छी हो सकती है, क्योंकि व्यंग्य ही साहित्य में ऐसा धारदार हथियार है जो विसंगतियों, विद...
सादर ब्लॉगस्ते! · 3M ago

लघुकथा : भांड

जिले ने गंभीर हो नफे से पूछा, "भाई ये भांड किसे कहते हैं?""कोई कलाकार जब स्वार्थवश अपनी कला को बेच देता है तो वह भांड बन जाता है।" नफे ने समझाया।जिले सिर खुजाते हुए बोला, "भाई मैं कुछ समझा न...
सादर ब्लॉगस्ते! · 3M ago

मेरा नया व्यंग्य संग्रह 'सहिष्णुता की खोज'

 मित्रो इस विश्व पुस्तक मेले में मेरी पाँचवी पुस्तक व तीसरे व्यंग्य संग्रह 'सहिष्णुता की खोज' का विमोचन शोभना सम्मान समारोह व पहले ऐतिहासिक युवा व्यंग्य सम्मेलन में दो दिनों तक लगातार दो बार...
सादर ब्लॉगस्ते! · 3M ago

गौरव त्रिपाठी के वीडियो

सादर ब्लॉगस्ते! · 5M ago

~फ्यासबुक में ग्यानैकि ढूँनखोज~

  फ्यासबुक आज मनखी जीवनक् खास अंग छ। नानतिन आपण इस्कूली किताब पढौ चाहे न पढौ, पैं ब्याव तलक पाँच छै बेरा फ्यासबुकाक् अपडेट क्वे लै हालतन् में पढी ल्हिनी। च्याल् यकैं चेलियांन् कैं पटूँण हु...
सादर ब्लॉगस्ते! · 5M ago

क्या देश वाकई में चीख रहा है (व्यंग्य)

    देश में इन दिनों चीख-पुकार मची हुई है। जब भी देश में कुछ नया होता है तो लोग चीखते हैं और पूरा दम लगाकर चीखते हैं। इस बार चीखने की शुरुआत 8 नवंबर, 2016 को हुई थी। बड़े नोटों की बंदी ने देश...
सादर ब्लॉगस्ते! · 6M ago

अब तेरा क्या होगा कालिया (व्यंग्य)

   काले धन उर्फ़ कल्लू, कल्लन, कालिया इन दिनों अधिकांश देशवासी तुम्हें दे रहे हैं जी भरकर गालियाँ। सरकार ने तुम्हें बाहर निकलने को कहा था लेकिन तुम नहीं निकले। फलस्वरूप तुम्हें बाहर निकालने क...