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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

मील गया होता

मुजे कोई रहमत का ईशारा मील गया होता, बीन पतवार नाव को किनारा मील गया होता, ना थी कोई मन्जील, ना पहेचान आसमां की, मील जाता रास्ता गर सहारा मील गया होता, उचाई पे उडते रहते परिन्दो को ले करके साथ, जन्नत की परीओ का नजारा मील गया होता, चांद भी अगर मसरुफ होता चांदनी [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

की है

हंगामा क्यों करते हो इबादत ही तो की है, जगडे मीटाने वास्ते सीयासत ही तो की है, भरम पाला था खुद के आला होने का यहां, सामने आयना रख हिफाजत ही तो की है, अन्जान शहर की गलीयो में भटकता रहा, एक जलक पाने की मशक्कत ही तो की है, वादो पे बस ऐतबार रख [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

શરમાય છે

વેણુ ના સાદે દોડી આવી ‘ને હવે શરમાય છે, ગોપીઓના વાદે મુજ રાધા મુજથી ભરમાય છે, કેમ કરી લેવી ખુશ્બુ માથે લગાડેલા ગજરાની, ઘુંઘટ હટાવ્યે ખોબામા લાલ ચહેરો સમાય છે, ચીત ચોર નો ખીતાબ આપી કર્યો છે મશહુર, ગોપી નદીના તટે મુજ કાજે આવી કરમાય છે, કદંબના ઝાડ નીચે એ મોરલો ખીલવે છે કળા, વૃદાંવનની [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

बात नीकली होगी

बात नीकली होगी तब जीक्र मेरा आया होगा, मै नही भाया तो क्या ओर कोई भाया होगा, मंद रोशनी में गुनगुनाते थे कुछ अकेले मगर, परदे के पीछे कोई ओर नही तेरा साया होगा, इश्क की रंगरेलियो में कइ रंग चडते है यारो, कोई खास रंग जरुर तेरे जहन में छाया होगा, कत्ल सिर्फ खंजर [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

Mothers day

ન કોઇ આશાએ, ન અપેક્ષાએ, જણ્યુ ત્યારે થયુ કષ્ટ, ઉછેર કર્યો ત્યારે કષ્ટ, બોલતા શીખવ્યો, ચાલતા શીખવ્યો, એક ઉંહકાર થતા થયુ કષ્ટ, ભણાવ્યો, ગણાવ્યો, આજે થયો છે મોટો, અને આજે તેને જ થયુ છે કષ્ટ, છાયો આપેલો તે છીનવા તત્પર, બોલવામાં પાબંધી, પગે બેડીઓ બાંધવા તત્પર, જે ઋણે બંધાયેલો છે, કેમ કરી ઉતારશે ? બોલી, [...
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

विचार

विचारो में कई बार हम अटक गये है, किनारो के करीब आ के भटक गये है, बिसात बीछा रखी है खेलने के वास्ते, हारने के डर से खेल से छटक गये है, नाच की ख्वाईश रखी पर आता नही, आंगन टेढा कह कर भी मटक गये है, धुप दिखाते है उसको सिर्फ दिखावे के, जो [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 3d ago

वोह कह गये थे

अश्को की छांव में मुद्दत से गुजर रही है जीन्दगी, जब से वोह कह गये थे लौट आउंगा एक दिन…. अब उनके नाम हमने कर दी है पुरी यह जीन्दगी, एक बार कहा था तुम्हे अपना बनाउंगा एक दिन…. ईन्तजार में खडे है उसी राह पर जहां छोड गये थे, कहा था उसने इसी पथ [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 1W ago

लगता है

कोइ पास रहते हुए भी दुर लगता है, कभी बेसुरा नग्मा भी सुर लगता है, हमने गुजारी ताउम्र तेरी ही बाहों मे, अब हर चहेरेमें तेरा ही नूर लगता है, तुम सामने रहो या तो रहो परदे में, तेरा साया भी चश्म-ए-बद्दुर लगता है, तेरी खुदाइ को किस कद्र मै बया करु, हर पथ्थर भी [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 1W ago

आज तलक

दीया जो था उसने हाथो में अपना हाथ, आज तलक हमने किसीसे वो हाथ मीलाया नही है, पहने थे जो कपडे जब थे उनके साथ, आज तलक हमने उन कपडो को धुलवाया नही है, चीराग जलाया था सामने रह महेफिलमें, आज तलक उस चीराग को हमने बुझाया नही है, हर सांस में बसा रखी है [...]
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હ્રદય ઉતર્યુ કાગળ પર · 1W ago

होता है

उठा वो हर परदा तेरा खास होता है, हर किरदार में तेरा अहेसास होता है, हर चहेरा दिखता है बहोत खुश पर, दरअसल वो अंदर से उदास होता है, प्यारकी नूमाइश करनेवाले है बहोत, नीस्वार्थ करनेवाला तेरे पास होता है, परदे के पी्छे रहके नीर्देश करता है तू, कथन पर चले तो जीवन रास होता [...]
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