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ANCHINHAR AKHAR · 4d ago

गजल

सपनाइत रहलहुँ हमडेराइत रहलहुँ हममँजाइत रहल एड़ीचिकनाइत रहलहुँ हमजते सुनेलक से सभपतिआइत रहलहुँ हमअइ हाथसँ ओइ हाथबदलाइत रहलहुँ हमहुनकर मोनक बाकससैंताइत रहलहुँ हमइम्हर उम्हर सभठाँउसनाइत रहलहुँ ...
ANCHINHAR AKHAR · 1W ago

गजल

कागजमे सुधार छलैफाइलमे बहार छलैकेहन बेबहार छलैकनियों नै विचार छलैटूटल बस पगार छलैसरकारो लचार छलैकिश्ती भरि कऽ आबि रहलजीवनमे उधार छलैबनि चिन्हार खूब फँसलअनचिन्हार पार छलैसभ पाँतिमे 22-212-112...
ANCHINHAR AKHAR · 2W ago

गजल

मोन मीलल बहुत बहुतनेह भेटल बहुत बहुतदूर गेलै जते जतेनीक लागल बहुत बहुतसाँच बजलहुँ कनी मनीसंग छूटल बहुत बहुतबात करता जखन जखनखाद फेंटल बहुत बहुतसाँझ खातिर कहीं कहींभोर टूटल बहुत बहुतआइ हुनकर क...
ANCHINHAR AKHAR · 3W ago

गजल

जिनका चाही पटना दिल्लीतिनका धेने छनि छिलमिल्लीनेता सुनिते सभ बुझि गेलैफल्लाँ बनलै पिल्ला पिल्लीजनताकेँ मानै छथि खाजासंविधानकेँ पानक खिल्लीजखने उठलै जुत्ता  तखनेहुनका ढ़ुकि गेलनि हलदिल्लीसत्त...
ANCHINHAR AKHAR · 4W ago

गजल

ठोरक गिलास ठोरक शराबके राखत किछु ठोपक हिसाबअनधन लछमी हुनका हिस्साहमरा हिस्सा गालक गुलाबउनटाबैए ओ चुप्पे चुपदेहक पन्ना मोनक किताबसुंदर शब्द भेलै बेकारओ अपने छथिन अपन जबाबअनचिन्हारक इयाद अबिते...
ANCHINHAR AKHAR · 1M ago

गजल

बान्हल भाषा बान्हल बोलअइ नाटकमे अतबे रोलहुनका कहने दुनियाँ टेढ़हुनके कहने दुनियाँ गोलखाली पेटक छै फरमानभरलाहाकेँ खोलै पोलचुप्पे आबै चुप्पे जाइहिनकर आँगन हुनकर टोलकिछु ने जानै अनचिन्हारके पहि...
ANCHINHAR AKHAR · 1M ago

गजल

संसार हमरो लेल छैअपकार  हमरो लेल छैराजा बहुत रानी बहुतदरबार हमरो लेल छैजइमे भुजेतै आन सेकंसार हमरो लेल छैतोहीं ठकेलह से तँ नैबटमार हमरो लेल छैपायल भने नै हो मुदाझंकार हमरो लेल छैसभ पाँतिमे 2...
ANCHINHAR AKHAR · 1M ago

गजल

भीजल कपड़ा गुदगर देहबिजली लागै सुंदर देहगौतम धेलथि इंद्रक भेषफेरो पाथर हुनकर देहहुनका ताकी कोने कोनहमरा लग छै जिनकर देहबज्जर सपना बज्जर आँखिबज्जर जीवन बज्जर देहसरकारक फाइल बहुते पैघदेखू घटलै...
ANCHINHAR AKHAR · 1M ago

गजल

जे लिखतैसे बचतैजे बचतैसे कहतैजे कहतैसे सुनतैजे सुनतैसे बुझतैजे बुझतैसे मरतैसभ पाँतिमे 222 मात्राक्रम अछिएहि गजलकेँ गंभीरतासँ लेबाक जरूरति नै ओहिना बोखारमे लीखि देने छियै तथापि जँ किनको अर्थ ...
ANCHINHAR AKHAR · 1M ago

गजल

विषवंदन युगधर्म छैपरिवर्तन युगधर्म छैजइमे खेने रोग होसे बरतन युगधर्म छैखाली अपने टा रहीसे कतरन युगधर्म छैखाली चाहथि मीठ रसमधुगुंजन युगधर्म छैबिन करने कल्याण नैगठबंधन युगधर्म छैसभ पाँतिमे 222...