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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 1W ago

अकेली औरत

शीर्षक पढ़कर ही अजीब सा एहसास होता है ना? कैसे गंदे-गंदे ख़याल आ जाते हैं मन में.  ”एक तो औरत, ऊपर से अकेली. कहाँ है, कैसी है, मिल जाती तो हम भी एक चांस आजमा लेते.” … ऐसा ही होता है. अकेली … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 2W ago

धूसर

दुनिया को जिस रंग के चश्मे से देखो, उस रंग की दिखती है. अभी धूसर रंग छाया हुआ है. जैसे अभी-अभी आँधी आयी हो और सब जगह धूल पसर गई हो या कहीं आग लगने पर धुँआ फैला हो या … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 3W ago

बाऊजी की बातें

मेरे बाऊजी बहुत दिलचस्प इंसान थे. चीज़ों को देखने का उनका खुद का नजरिया होता था और वो बड़ा अलग और अनोखा था. किसी भी विषय में मेरी उत्सुकता का उत्तर वे बहुत तार्किक ढंग से देते थे. ऐसे कि … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 3M ago

क्योंकि हर एक दोस्त – - – होता है

दो-तीन दिन पहले फेसबुक पर एक मजेदार चीज़ देखी. उसमें लिखा था कि कुछ रिश्ते ‘टॉम एंड जेरी’ जैसे होते हैं. एक-दूसरे को चिढ़ाते हैं, तंग करते हैं, खिंचाई करते हैं, शिकायत करते हैं, लेकिन एक-दूजे के बगैर रह भी … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 7M ago

दिए के जलने से पीछे का अँधेरा और गहरा हो जाता है…

मैं शायद कोई किताब पढ़ रही थी या टी.वी. देख रही थी, नहीं मैं एल्बम देख रही थी, बचपन की फोटो वाली. अधखुली खिड़की से धुंधली सी धूप अंदर आ रही थी. अचानक डोरबेल बजती है. मैं दरवाजा खोलती हूँ, … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 8M ago

दिल्ली पुस्तक मेले से लौटकर

हॉल नंबर बारह में घुसते ही सबसे पहले राज कॉमिक्स की स्टाल पर नज़र पड़ी और बरबस ही पूजा की याद आ गयी. अभी परसों ही उसने बज़ पर लिखा था कि उसे हावड़ा स्टेशन पर अपनी मनपसंद राज कॉमिक्स … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 9M ago

छूटा हुआ कुछ

पिछले कुछ दिनों से मुझे मेरा घर बहुत याद आ रहा है. बाऊ के रहते डेढ़-दो महीने भी जिससे दूर नहीं रह पाती थी, आज उसे छूटे हुए पाँच साल से ज्यादा हो रहे हैं. कितना सोचा कि अब उस … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 9M ago

इस मोड़ से जाते हैं …

बहुत-बहुत मुश्किल होता है अपने ही फैलाए हुए जाल से बाहर निकलना. पहले तो हम चीज़ों को सीरियसली लेते ही नहीं, हर काम पेंडिंग में डालते चलते हैं और जब यही पेंडिंग बातें, मसले, फैसले आपस में उलझ जाते हैं, … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 1Y ago

अम्मा के सपने

वैसे तो माँ को याद करने के लिए कोई एक ख़ास दिन नहीं होता, वो हर समय पास-पास ही रहती है, उसकी तस्वीर आँखों में और यादें हर वक्त दिल में होती हैं,लेकिन फिर भी एक ख़ास दिन जब सब … Continue reading →
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ARADHANA-आराधना का ब्लॉग · 1Y ago

खतरा कहीं भी हो सकता है

आज मेरे साथ एक ऐसी घटना हुयी, जिसने मुझे कुछ विचलित कर दिया और थोड़ा दहला भी दिया. मैं अक्सर शाम को सोना को लेकर अपने मोहल्ले के पीछे की खाली जगह पर टहलने जाती हूँ. शाम को वहाँ बहुत भीड़ होती है. यहाँ औरतें और वृद्धजन टहलते हुए और बच्चे और युवा खेलते नज़र [...]
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