क्या कभी कोई ऐसी भाषा
उदयप्रकाश ने लिखा एक भाषा हुआ करती है भारतेंदु ने भाषा को उन्नति का मूल कहा राज ठाकरे नहीं मानता कोई भाषा या वो नही समझता कोई भाषा सभ्य भी हो सकती है भाषा को ले कर कितना सजग है वो
प्रभाष जी के बिना हिन्दी पत्रक्रारित
प्रभाष जोशी का निधन हिन्दी पत्रकारिता जगत के लिये एक अपूरणीय क्षति है । वे न केवल एक महान पत्रकार थे बल्कि एक महान विचारक भी थे । हिन्दी पत्रकारिता को उन्होने उच्च मूल्य प्रदान किए तथा पत्रकारिता को एक नया मुहावरा भी दिया । नयी भाषा , नए तेवर लेकर जनसत्ता का आगमन उनकी क
हम भी हैं विकास की राह में ( नयी दुनिया
अभी कल ही अखबार में खबर पढ़ी कि स्वाइन फ्लू का पहला रोगी आखिर हमारे शहर में भी मिल गया । सच मानिए कि दिल को इतनी तसल्ली मिली कि शब्दों में बयान करना संभव नहीं है । चलो , दुनिया को मुँह दिखाने के काबिल तो बचे हम वरना हीनता बोध से मरे जा रहे थे । रोज अखबारों में समाचार छप रहे थ
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