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GUZARISH · 1W ago

चुनावी होली दोहे

सरिता मेरा नाम है ,बढ़ती हूँ निष्काम।मोदी की जय बोल दो , बोलो जय श्री राम।।जो गी रा सा रा रालाया है होली मिलन, खुशियाँ आज विशेषअभिनन्दन है भाजपा, शुभकामना अशेष।।जो गी रा सा रा राख़ुशी हुई है द...
GUZARISH · 3M ago

मेरी हार या मेरी जीत

याद है मुझे वो लम्हा जब वो बढ़ चला था जिंदगी की पगडंडियों पर पाने को अपना अंतिम लक्ष्य मैं देख रही थी सुनहरे सपनेउसके साथ जीने के मकसद तो एक ही था जीवन से मृत्यु का मिलन लेकिन
GUZARISH · 5M ago

अभिषेक के जन्मदिवस पर

जन्मदिवस शुभकामना, देता है परिवार।चाचा, दादा ,माँ ,भुआ ,सभी लुटायें प्यार।।आई है शुभ अष्टमी ,और जन्मदिन आज ।रहे सदा ही आपका,हर पल शुभ आगाज|| सुनो हमारे लाड़ले ,सुनना देकर ध्यान।जो करता सबका भ...
GUZARISH · 6M ago

मैं यहाँ तू वहाँ [ गजल ]

यह वक्त.. ये दिन ... ये रात.... गुजर तो रहे हैं लेकिन गुजारे नहीं जाते ........ तुम्हारे बिन...मैं यहाँ तू वहाँ, फासले दरमियाँआती जाती पवन ,कह रही दास्ताँ |गुजरती ही नहीं, तेरे बिन जिंदगी इस...
GUZARISH · 7M ago

राखी [कुण्डलिया]

कहती बहना वीर से , ह्रदय रखो ना खोट जल्दी लगवाओ तिलक, और दिखाओ नोट |और दिखाओ नोट, फ़ोन है लेना भैया व्हाट्सएप्प उसमें चले ,पार लगे तभी नैया चैट करें सब दोस्त , देखती उनको रहती भैया सुनो गुहार...
GUZARISH · 7M ago

रक्षाबंधन [दोहावली]

छुट्टी ले भाई गया ,राखी का त्यौहार भाई बहना हैं मिले, निश्चल पावन प्यार |कैसे भला निभा सके, राखी का त्यौहार छूट गई है नौकरी ,महँगाई की मार |राखी का त्यौहार है, सजे हुए बाजार बहना धागा बाँधती...
GUZARISH · 7M ago

सावन दोहे

भीगा भीगा है समय,पहली है बरसात।मानसून लो आ गया ,भीगे हैं जज्बात।।सारी धरती खिल उठी ,खुश है आज विशेष सावन की बौछार से ,रहा नहीं दुख शेष ||चमक दामिनी देखती ,धरती का क्या हाल सूखा कुछ अब ना रहा...
GUZARISH · 7M ago

अच्छा लगता है [ गजल ]

1222         1222    1222यूँ तेरा मुस्कुराना अच्छा लगता है झुकी नजरें चुराना अच्छा लगता हैदिलों को जीतना फितरत सही मेरी  क्यों तुमसे हार जाना अच्छा लगता हैभरा दामन है मेरा काँटों से लेकिन सु...
GUZARISH · 7M ago

रिश्ते हैं सब नाम के [दोहावली]

पति पत्नी यूँ आजकल, करते हैं गुड फील।रिश्ते हैं सब नाम के, होती केवल डील।।बेटा कहता बाप से ,फ्यूचर मेरा डार्क। रास न आये इण्डिया ,जाना है न्यूयार्क।।बेटी कहती माँ सुनो,तुम तो रही गँवार।पढ़ लि...
GUZARISH · 7M ago

सूखा आषाढ़ दोहे

ईश्वर की लीला अगम , कैसा यह आषाढ़ सूखा देखा है कहीं, और कहीं है बाढ़ |१|सूखा बीता जेठ है, सूखा है आषाढ़ हलधर चाहे मेघ से ,रहम नेह की बाढ़ |२|मेघा दिखते ना कहीं, तक तक सूखे नैन सूरज छुप जा तू कही...