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Kashish - My Poetry · 1W ago

दुख दर्द दहन हो होली में

दुख दर्द दहन हो होली में,हो रंग ख़ुशी के होली में।तन मन आंनदित हो जाये,जब रंग उड़ेंगे होली में।सब भेद भाव मिट जायेंगे,जब गले मिलेंगे होली में।
Kashish - My Poetry · 2W ago

बेटी

आँगन है चहचहाता, जब होती बेटियां,गुलशन है महक जाता, जब होती बेटियां।आकर के थके मांदे, घर में क़दम रखते,हो जाती थकन गायब,जब होती बेटियां।रोशन है रात करतीं, जुगनू सी चमक के,जीने की लगन देती, जब...
Kashish - My Poetry · 3W ago

कैसी यह मनहूस डगर है

भूल गयी गौरैया आँगन,मूक हुए हैं कोयल के स्वर,ठूठ हुआ आँगन का बरगद,नहीं बनाता अब कोई घर।लगत...
Kashish - My Poetry · 1M ago

क्षणिकाएं

जीवन की सांझएक नयी सोचएक नया दृष्टिकोण,एक नया ठहरावसागर की लहरों का,एक प्रयास समझने काजीवन को जीवन की नज़र से।*****होता है कभी आभासकिसी के साथ होने काघर के सूनेपन में,दिखाता है कितने खेल
Kashish - My Poetry · 4M ago

समस्याएं अनेक, व्यक्ति केवल एक

समस्याएँ अनेकउनके रूप अनेकलेकिन व्यक्ति केवल एक।नहीं होता स्वतंत्र अस्तित्वकिसी समस्या या दुःख का,नहीं होती समस्याकभी सुप्तावस्था मेंजब जाग्रत होता 'मैं'घिर जाता समस्याओं से।मेरा 'मैं'देता ए...
Kashish - My Poetry · 6M ago

संवेदनहीनता

दफ्न हैं अहसासमृत हैं संवेदनाएं, घायल इंसानियत ले रही अंतिम सांस सड़क के किनारे,गुज़र जाता बुत सा आदमी मौन करीब से.नहीं है अंतर गरीब या अमीर मेंसंवेदनहीनता की कसौटी पर.
Kashish - My Poetry · 7M ago

ज़िंदगी कुछ नहीं कहा तूने

ज़िंदगी कुछ नहीं कहा तूने,मौन रह कर सभी सहा तूने।रात भर अश्क़ थे रहे बहते,पाक दामन थमा दिया तूने।लगी अनजान पर रही अपनी,दर्द अपना नहीं कहा तूने।फूल देकर सदा चुने कांटे,ज़ख्म अपना छुपा लिया तूने।
Kashish - My Poetry · 8M ago

याद दे कर न तू गया होता

काश तुमसे न मैं मिला होता,दर्द दिल में न ये पला होता।रौनकों की कमी न दुनिया में,एक टुकड़ा ह...
Kashish - My Poetry · 9M ago

ज़िंदगी कुछ ख़फ़ा सी लगती है

ज़िंदगी कुछ ख़फ़ा सी लगती है,रोज़ देती सजा सी लगती है।रौनकें सुबह की हैं कुछ फीकी,शाम भी बेमज़ा सी लगती है।राह जिस पर चले थे हम अब तक,आज वह बेवफ़ा सी लगती है।संदली उस बदन की खुशबू भी,आज मुझको कज़ा ...
Kashish - My Poetry · 10M ago

अप्प दीपो भव

बुद्ध नहीं एक व्यक्ति विशेषबुद्ध है बोध अपने "मैं" काएक मार्ग पहचानने का अपने आप को,नहीं करा सकता कोई औरपहचान मेरी मेरे "मैं" से,मिटाना होगा स्वयं हीअँधेरा अपने अंतस का,'अप्प दीपो भव' नहीं क...