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Kashish - My Poetry · 3W ago

चलो पथिक आगे बढ़ जाओ

चलो पथिक आगे बढ़ जाओ,यहाँ किसी का साथ न होगा।नियति है तेरी चलना तनहा,यहाँ कोइ हमराह न होगा।कुछ पल की रौनक है जीवन,फिर आगे का सफ़र अकेला।
Kashish - My Poetry · 2M ago

दर्द को आशियां मिला

दर्द को आशियां मिला,मिरे घर का निशां मिला.तू न मेरा नसीब था,दर्द का साथ तो मिला.रात भर जागते रहे,सुबह खाली मकां मिला.ज़िंदगी इस तरह रही,हर कि
Kashish - My Poetry · 2M ago

क्षणिकाएं

व्याकुल हैं भावउतरने को पन्नों पर,लेकिन सील गये पन्नेरात भर अश्कों से,सियाही लिखे शब्दों क...
Kashish - My Poetry · 3M ago

आज दिल ने है कुछ कहा होगा

आज दिल ने है कुछ कहा होगा,अश्क़ आँखों में थम गया होगा।आज खिड़की नहीं कोई खोली,कोइ आँगन में आ गया होगा।आज सूरज है कुछ इधर मद्धम,केश से मुख है ढक लिया होगा।दोष कैसे किसी को मैं दे दूं,तू न इस भा...
Kashish - My Poetry · 4M ago

पतझड़

हरे थे जब पातअपनों का था साथगूँजते थे स्वर टहनियों पर बने घोंसलों से।रह गया जब ठूंठअपने गये छूट
Kashish - My Poetry · 5M ago

दर्द बिन ज़िंदगी नहीं होती

दर्द जिसकी दवा नहीं होती,ज़िंदगी फ़िर सजा नहीं होती।चाँद आगोश में छुपा जब हो,नींद भी नींद है नहीं होती।ज़िंदगी साथ में गुज़र पाती,चाँद की चांदनी नहीं रोती।कुछ तो कह कर जो गये होते,तस्कीने दिल कु...
Kashish - My Poetry · 7M ago

क्षणिकाएं

    (1)चहरे पर जीवन केउलझी पगडंडियांउलझा कर रख देतींजीवन के हर पल को,जीवन की संध्या मेंझुर्रियों की गहराई मेंढूँढता हूँ वह पलजो छोड़ गये निशानीबन कर पगडंडी चहरे पर।    (2)
Kashish - My Poetry · 8M ago

दुख दर्द दहन हो होली में

दुख दर्द दहन हो होली में,हो रंग ख़ुशी के होली में।तन मन आंनदित हो जाये,जब रंग उड़ेंगे होली में।सब भेद भाव मिट जायेंगे,जब गले मिलेंगे होली में।
Kashish - My Poetry · 8M ago

बेटी

आँगन है चहचहाता, जब होती बेटियां,गुलशन है महक जाता, जब होती बेटियां।आकर के थके मांदे, घर में क़दम रखते,हो जाती थकन गायब,जब होती बेटियां।रोशन है रात करतीं, जुगनू सी चमक के,जीने की लगन देती, जब...
Kashish - My Poetry · 8M ago

कैसी यह मनहूस डगर है

भूल गयी गौरैया आँगन,मूक हुए हैं कोयल के स्वर,ठूठ हुआ आँगन का बरगद,नहीं बनाता अब कोई घर।लगत...