Add Your Blog | | Signup
Laxmirangam · 5d ago

हिंदी दिवस 2017 विशेष - हमारी राष्ट्रभाषा

हमारी राष्ट्रभाषा. परतंत्रता की सदियों मे स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को एक जुट करने के लिए राष्ट्रभाषा शब्द का शायद प्रथम प्रयोग हुआ. गाँधी जी खुद मानते और चाहते थे कि राष्ट्र...
Laxmirangam · 1W ago

दीपा

दीपा हर दिन की तरह मुंबई की लोकल ट्रेन खचाखच भरी हुई थी. यात्री भी हमेशा की तरह अंदर बैठे, खड़े थे. गेट के पास कुछ यात्री हेंडल पकड़े खड़े थे तो कुछ बाहर की तरफ झुके हुए थे. दैनिक यात्री...
Laxmirangam · 2W ago

आस्था : बहता पानी

आस्था : बहता पानी                 तैरना सीखने की चाह में,                 वह समुंदर किनारे                  अठखेलियाँ करने लगी.                                  लहरें कभी प...
Laxmirangam · 3W ago

संप्रेषण और संवाद

संप्रेषण और संवाद  आपके कानों में किसी की आवाज सुनाई देती है. शायद कोई प्रचार हो रहा है. पर भाषा आपकी जानी पहचानी नहीं है. इससे आप उसे समझ नहीं पाते. संवाद तो प्रसारित हुआ, यानी संप्रेषण...
Laxmirangam · 1M ago

इस गली में आना छोड़ दो

                               इस गली में आना छोड़ दो                            रे चाँद,                  हर रात, इस गली                  आया न करो.                  इस गली ...
Laxmirangam · 3M ago

निर्णय ( भाग 2)

निर्णय (भाग 2)                                                   (भाग 1 से आगे) रजत भी समझ नहीं पा रहा था कि कैसे अपनी भावना संजना तक पहुँचाए। डर भी था कि संजना उसकी बात से नाराज हो ग...
Laxmirangam · 3M ago

निर्णय (भाग 1)

निर्णय ( भाग -1) बी एड में अलग अलग कॉलेजो से आए हुए अलग अलग विधाओं के विद्यार्थी थे । सबकी शैक्षणिक योग्यताएँ भी समान नहीं थीं । रजत इतिहास में एम ए था । उसे लेखन का शौक था और वह बहुत ...
Laxmirangam · 4M ago

पुस्तक प्रकाशन

पुस्तक प्रकाशन हर रचनाकार, चाहे वह कहानीकार हो, नाटककार हो या समसामयिक विषयों पर लेख लिखने वाला हो, कवि हो या कुछ और, चाहेगा कि मेरी लिखी रचनाएं पुस्तक का रूप धारण करें. हाँ शु...
Laxmirangam · 4M ago

एक पुस्तक की प्रूफ रीडिंग

एक पुस्तक की प्रूफ रीडिंग सबसे पहली बात: “प्रूफ रीडर का काम पुस्तक में परिवर्तन करना नहीं है, केवल सुझाव देने हैं कि पुस्तक में क्या कमियां हैं और उनका निराकरण कैसे किया जाए. अ...
Laxmirangam · 6M ago

मजबूरियाँ

मजबूरियाँ. मिटा ही न देना तुम दूरियां समझो जमाने की मजबूरियाँ ।।  इतनी बढ़ाओ न नजदीकियाँ, बढ़ती रहेंगी तो खुशियाँ मिलेंगी तिनकों के सागर सी दुनियां मिलेगी झूमेंगे तन मन औ बगिया खिलेगी ।। म...