Add Your Blog | | Signup
Maahi · 1Y ago

ये ज़िन्दगी..

पाँच पांडवों के बीच फँसीद्रौपदी सी हो गयी है ज़िन्दगी।किसका कब साथ निभाऊं कुछ समझ में नहीं आता।जहाँ देखूँ वहीँ पे मेरा अपना खड़ा होता है,पर किसके साथ कहाँ जाऊँ कुछ समझ में नहीं आता।मैंने तो चु...
Maahi · 2Y ago

सफ़र-ए-दर्द का राही

जागता रहा रात भरअपने गुनाहों को याद करता मैंखुद से ही माफ़ी माँगताऔर खुद को ही सजा देता मैं।हर सजा के बादगुनाह खुद मुझसे पूछताक्यों तूने मुझे कियाऔर फिर मुझसे रूठता।न जवाब थान शर्मिंदगीजाने क...
Maahi · 2Y ago

जाने क्यों..?

जब मैं तुमसे मिली थीतब कुछ खास नहीं लगे तुमपर शायद कोई तो बात थी तुममेजिस कारणमैने तुमसेदोस्ती करना चाही।हममेधीरे धीरेबातबातों की शुरुआत हुई।फिर इन्हींबातों बातों मेंमैं तुम्हे जानने लगी।तुम...
Maahi · 2Y ago

दीवानी हूँ मैं उसके प्यार की..

ए साहिब!पागल न कहना मुझेके दीवानी हूँ मैं उसके प्यार कीवो माही है मेराऔर मंज़िल हूँ मैं उसके नाम की।क्या कहना अदाओं के उसकेके कभी बड़ा हँसाता है वो मुझकोरो लेता है खुद में हीपर बड़ा गुदगुदाता ह...
Maahi · 2Y ago

यादों के झरोखों से....

यादों के झरोखों से एक याद अब भी याद आती हैवो बचपन की अठखेलियाँदोस्तों के साथ की सैकड़ों मस्तियाँमुझे अब भी याद आती है।कोई लौटा नहीं सकताअब वो सुनहरे पल मुझेके ज़िन्दगी की भाग दौड़मुझे अब भी नही...