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नमस्ते मन की बातें बन जाती कवितायें

Hindi - Kavita, Poems, Hindi
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नमस्ते · 3M ago

जिसे छिन - छिन गढ़ा गया . .

कविता है, कर्म की भूमिका ।पहले कभी थी ,मन की व्यथा अथवा जीवन की कथा ।कभी - कभी कल्पना ,अनुभव की विवेचना ।और हमेशा सरलता की आभा  . . प्रसन्न निश्छल ह्रदय की मयूरपंखी छटा ।जाने क्या - क्याअनुभ...
नमस्ते · 5M ago

कमाई

"पाँच रुपये का गम देना" . . स्टेशनरी की दुकान पर  एक बच्चे ने कहा  . . तो हँसी आ गई !मन में सोचा -बच्चा है !तब ही पैसे देकर ग़म खरीद रहा है !मासूम है !दुनिया की रवायतों से अनजान है,सो ग़म का स...
नमस्ते · 5M ago

दुःख के लिए जगह मत छोड़ो

सुख इतना उपजाओ मन में, दुःख के लिए जगह मत छोड़ो।  मिट्टी में बीज बो कर देखो। फिर देखो कितनी...
नमस्ते · 5M ago

कोई सुन रहा है

कई बार ऐसा होता है  . . जब धूप ढ़ल रही होती है,   अंतर्मन में कहीं सूर्य अस्त होने लगता है ...
नमस्ते · 5M ago

वर दे माँ !

माँ सरस्वती वर दे !मन के मौन स्वरमुखर कर दे !वर दे !वरद हस्तशीश पर रख दे !मस्तक परजिजीविषा का तिलक कर दे !आत्मबल का चन्दन लेप दे !स्वाभिमान लिख दे !वर दे !भवितव्य का सामना करने कासाहस दे माँ !भाग्य को बदलने कामनोबल दे माँ !संघर्ष में सुख खोजने कीदृष्...
नमस्ते · 6M ago

समझो महिमा !

कोल्हू का बैल उन्हें चाहिए  . . आकाओं को ।कोल्हू का बैल जो कभी चूँ तक ना करे ।जो कहें, बस उतना करे । बस तेल बढ़िया निकलना चाहिए,चारे का इंतज़ाम तो हो जाएगा ।सवाल मत पूछा करो  !जी हजूरी किया कर...
नमस्ते · 6M ago

कांच

जब जब मन कांच की तरह चकनाचूर हुआ  . . और कई बार हुआ  . . एक एक टुकड़ा मैंने सहेजा,और संभाल कर रखा ।उनमें बार - बार अपना अक्स देखा और सोचा  . . चलो ये भी कोई बुरा सौदा तो नहीं !टूटी चीज़ों को ज...
नमस्ते · 6M ago

अभिमन्यु

हारने के डर से अभिमन्यु लड़ना नहीं छोड़ता ।तो क्या हुआ कि उसकी विद्या अधूरी है ?चक्रव्यूह को भेद कर बाहर निकलना आना ज़रूरी है ।अभिमन्यु को पता है,युद्ध टाला नहीं जा सकता ।समय पर जो विद्या काम न...
नमस्ते · 7M ago

ज़िद कर !

आज तेरा दिन है । बड़ा दिन है । जो औरों का दुःख-दर्द अपना करसूली पर चढ़ गया,उसने तुझे भेजा है आज के दिन।तू दुनिया को बड़े दिन का तोहफ़ा है ।अपनी पीड़ा आत्मसात कर दुनिया को हँसाना तेरी बेबाक़ अदा है...
नमस्ते · 7M ago

कर्म ही कविता है

बड़े बड़े व्याख्यान, उपदेश महान, लेख, आलेख, बुद्धिजीवियों के सुझाए सारगर्भित समाधान, विश्लेषण, विवेचना, समालोचना, काव्य के सजावटी फूल, सब रह जाते हैं धरे के धरे ।सब रह जाते हैं धरे के धरे,अगर ...